रविवार, 4 अगस्त 2024

पितृसत्ता खत्म क्यों नहीं हो रही बहिनचोs

 मैंने कहा -

आसमान का रंग नीला है

और सूरज का रंग लाल


उसने कहा-
पर उदय और अस्त के समय का रंग
भगवा है
भगवा ही शाश्वत है
यही सनातन है

मैंने कहा -
ये देश गधों से भरा हुआ
एक अस्तबल है

उसने कहा-
तुम देशद्रोही हो
उन्नत नस्लें इसी अस्तबल में पैदा हुई हैं

मैंने कहा-
राष्ट्र पीछे चल रहा
पर राष्ट्रवाद अपना ख़ूनी पंजा लिये आगे-आगे भाग रहा

उसने कहा-
सब चंगा-सी
हम ही सबसे बड़े मानवतावादी हैं

मैंने कहा-
पितृसत्तावादी होना
मानवतावादी होना नहीं है

उसने झल्लाकर कहा-
'आख़िर ये पितृसत्ता खत्म क्यों नहीं हो रही बहिनचोs'


-विनोद मिश्र