मैंने कहा -
आसमान का रंग नीला है
और सूरज का रंग लाल
उसने कहा-
पर उदय और अस्त के समय का रंग
भगवा है
भगवा ही शाश्वत है
यही सनातन है
मैंने कहा -
ये देश गधों से भरा हुआ
एक अस्तबल है
उसने कहा-
तुम देशद्रोही हो
उन्नत नस्लें इसी अस्तबल में पैदा हुई हैं
मैंने कहा-
राष्ट्र पीछे चल रहा
पर राष्ट्रवाद अपना ख़ूनी पंजा लिये आगे-आगे भाग रहा
उसने कहा-
सब चंगा-सी
हम ही सबसे बड़े मानवतावादी हैं
मैंने कहा-
पितृसत्तावादी होना
मानवतावादी होना नहीं है
उसने झल्लाकर कहा-
'आख़िर ये पितृसत्ता खत्म क्यों नहीं हो रही बहिनचोs'
-विनोद मिश्र